हनुमानगढ़ जिले में तकनीकी शिक्षा संस्थानों को लग रहा ताला !

- मनोज कुमार गोयल

हनुमानगढ़. केन्द्र सरकार स्किल इंडिया अभियान चला कर युवाओं में दक्षता लाने के लिए कार्य करने का दावा कर रही है लेकिन जिले में तकनीकी शिक्षा (टेक्नीकल एज्युकेशन) की जो स्थिति है, वह अच्छी नहीं है। जिले में युवा वर्ग में तकनीकी शिक्षा के प्रति मोहभंग हो रहा है। यही वजह है कि जिले में तकनीकी संस्थान तेजी से बंद हो रहे हैं। तकनीकी शिक्षा एज्युकेशन संस्थाओं में युवाओं का प्रवेश बहुत तेजी से कम हुआ है।


नतीजा यह हुआ है कि जिले का एकमात्र इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो गया और पांच डिप्लोमा कॉलेज बंद हो गए हैं। यही स्थिति जिले में आईटीआई की है। तीन वर्ष में जिले में एक भी नई निजी आईटीआई नहीं खुली है बल्कि डेढ़ दर्जन के करीब बंद हो गई हैं। हनुमानगढ़ जिले में सात डिप्लोमा टेक्नीकल एज्युकेशन इंस्टीट्यूट करीब डेढ दशक के दौरान खुले थे। इनमें सबसे पहले यहां वर्ष 2007 में श्रीदेवी महिला पॉलीटेक्नीकल एज्युकेशन संस्थान खुला था। इसके बाद हनुमानगढ़ टाउन में गजानंद सर्राफ इंजीनियरिंग एज्युकेशन संस्थान, जीआर ढाका टेक्नीकल एज्युकेशन संस्थान, भादरा में विवेकानंद टेक्नीकल एज्युकेशन संस्थान एवं गोदारा टेक्नीकल एज्युकेशन संस्थान और नोहर में गोदारा टेक्नीकल एज्युकेशन संस्थान वर्ष 2009 से 2011 के मध्य आरंभ हुए थे।


इसके अलावा वर्ष 2011 में ही राजकीय पॉलीटेक्नीकल कॉलेज यहां स्वीकृत हुआ और वर्ष 2014 में वह स्वयं के भवन में आरंभ हुआ लेकिन लगातार कम हो रहे एडमिशनों के चलते हनुमानगढ़ स्थित राजकीय पॉलीटेक्नीकल कॉलेज एवं श्रीदेवी कन्या पॉलीटेक्नीकल संस्थान को छोड़ कर सभी टेक्नीकल एज्युकेशन संस्थाओं में नए एडमिशन बंद हो गए हैं। श्रीदेवी महिला पॉलीटेक्नीकल एज्युकेशन संस्थान और राजकीय पॉलीटेक्नीकल कॉलेज में भी एडमिशन निर्धारित टै्रड और सीटों की तुलना में काफी कम हैं।


जिले में राजकीय एवं निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में भी स्थितियां विपरीत हैं। जिले में हनुमानगढ़ जंक्शन, संगरिया के दीनगढ़ और टिब्बी के सूरेवाला में राजकीय आईटीआई संस्थान हैं। इसके अलावा 3८ निजी आईटीआई पंजीकृत हैं। इनमें से सात निजी आईटीआई अधिकृत तौर पर बंद हो गई हैं और एक दर्जन निजी आईटीआई में नए एडमिशन नहीं हो रहे हैं। यानि वह भी बंद होने की तरफ अग्रसर हैं। हालात यह है कि जिले में चल रही राजकीय और निजी आईटीआई में निर्धारित सीटों में से आधे से ज्यादा सीटें रिक्त हैं।


करोड़ों रुपए से निर्मित भवन अनुपयोगी
जिले में पॉलीटेक्नीकल एज्युकेशन के प्रति कम हुए रूझान के चलते करोड़ों रुपए से निर्मित टेक्नीकल एज्युकेशन संस्थानों के बड़े-बड़े भवन और फर्नीचर एवं सामग्री अनुपयोगी पड़ी है और धूल फांक रही है। जिले का एकमात्र निजी इंजीनियरिंग कॉलेज बड़े प्रचार-प्रसार के साथ आरंभ हुआ था लेकिन महज पांच वर्ष के दौरान ही बंद हो गया। कमोबेश यही स्थिति डिप्लोमा कॉलेजों की रही।


कम होता रोजगार के अवसर बना बड़ा कारण
जानकारों के अनुसार टेक्नीकल एज्युकेशन के प्रति कम होते रूझान की सबसे बड़ी वजह रोजगार के अवसर कम होना रहा है। टेक्नीकल एज्युकेशन करने वाला हर युवा रोजगार चाहता है। राजकीय एवं निजी क्षेत्र में हाल के वर्षों में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में रोजगार में काफी कमी आई है, दूसरे स्तरीय तकनीकी शिक्षा काफी महंगी है, ऐसे में युवा वर्ग का रूझान इस तरफ काफी कम हो रहा है।


चिंता का विषय
तकनीकी शिक्षा के प्रति रूझान कम होना चिंता का विषय है। इसकी मुख्य वजह है कि हर युवा टेक्नीकल एज्युकेशन के बाद राजकीय सेवा में जाना चाहता है। जिसमें अवसर अभी कुछ कम हुए हैं। ऐसे में रूझान कम हो रहा है।
- आनन्द जैन, प्रिंसीपल, राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज, हनुमानगढ़।



source https://www.patrika.com/hanumangarh-news/technical-education-institutions-are-getting-locked-in-hanumangarh-dis-7192676/

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