खेलों में खल रही 'खिलाडिय़ों' की कमी

खेलों में खल रही 'खिलाडिय़ों' की कमी
- शिक्षा विभाग की विद्यालयी जिला एवं ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिताओं में उदासीनता के चलते कम आ रही टीम
- कोरोना महामारी के बाद सुस्त माहौल, खेल मैदान नहीं होने, पीटीआई के अन्यत्र व्यस्त होने एवं विद्यालयों की कम रुचि बनी बाधा
अदरीस खान @ हनुमानगढ़. जिले से लेकर प्रदेश भर में इन दिनों विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन चल रहा है। ब्लॉक एवं जिला स्तरीय प्रतियोगिताएं अंतिम चरण में हैं। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से जुड़े निजी एवं राजकीय विद्यालय इन खेलों में भाग ले रहे हैं। इसके बावजूद खेलों में खिलाडिय़ों की कमी खल रही है। इस साल से छात्रा वर्ग की जो प्रतियोगिताएं प्रारंभ की गई हैं, उन खेलों में टीम व खिलाड़ी कम पहुंच रहे हैं। यद्यपि बरसों से जो खेल एवं प्रतियोगिताएं विद्यालयी खेलकूद स्पर्धा में शामिल हैं, उनमें भी इस साल खिलाडिय़ों व टीम की हाजिरी कम ही रही है।
इसका मोटा कारण तो यही माना जा रहा है कि कोरोना संक्रमण के चलते पिछले दो शिक्षा सत्र में खेल क्या, पढ़ाई व परीक्षा व्यवस्था भी डांवाडोल रही है। ऐसे में अब खेलों के प्रति अपेक्षाकृत रुचि शिक्षण संस्थाओं ने नहीं दिखाई है। यह स्थिति निजी व राजकीय विद्यालयों की कमोबेश एक जैसी रही है। इसके अलावा स्कूलों में खेल मैदान का अभाव, कई राजकीय विद्यालयों में भूमि होने के बावजूद प्रमुख खेलों के मैदान विकसित करने के बजाय उनको खेती के लिए ठेके पर देना, शारीरिक शिक्षकों की कमी या फिर नियुक्ति के बावजूद उनका अन्यत्र व्यस्त होना, शिक्षण संस्थाओं की खेलों में रुचि कम होना आदि प्रमुख कारण माने जा सकते हैं।
यह रही स्थिति
जानकारी के अनुसार पहली बार विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिता में शामिल की गई बालिका क्रिकेट प्रतियोगिता में टीम बहुत कम पहुंची हैं। 17 वर्ष छात्र एवं छात्रा वर्ग की क्रिकेट प्रतियोगिता किशनपुरा दिखनादा के राउमावि में चल रही है। इसमें छात्रा वर्ग में केवल चार ही टीम पहुंची है। जबकि छात्र वर्ग में 17 टीम भाग ले रही है। 19 वर्ष क्रिकेट प्रतियोगिता छात्र एवं छात्रा वर्ग की पीलीबंगा में खेली जा रही है। इसमें छात्र वर्ग में 18 तथा छात्रा वर्ग में केवल सात टीम ही पहुंची है। भूकरका के राउमावि में खेली गई जिला स्तरीय फुटबाल प्रतियोगिता में 19 वर्ष छात्रा वर्ग में महज छह टीम ही पहुंची। जबकि 17 वर्ष बालिका वर्ग में पांच टीम ही आई। वहीं बालक 19 एवं 17 वर्षीय में क्रमश: 19 व नौ टीम ही खेली।
हॉकी में तो हालत खस्ता
जिला स्तरीय हॉकी प्रतियोगिता सोनड़ी राउमावि में खेली गई। इसमें छात्र एवं छात्रा दोनों ही वर्गों में बहुत कम टीम खेलने पहुंची। 17 वर्ष छात्र वर्ग में पांच तथा छात्रा वर्ग में छह टीम आई। वहीं 19 वर्ष छात्र वर्ग में पांच तथा छात्रा वर्ग में छह टीम खेलने पहुंची। खो-खो विद्यालयों में खूब खेला जाता रहा है। इस बार जिला स्तरीय 17 एवं 19 वर्ष छात्रा वर्ग की खो-खो प्रतियोगिता राउमावि कान्हेवाला में खेली जा रही है। इसमें 17 वर्ष में 19 टीम तथा 19 वर्ष में 15 टीम भाग ले रही है।
यह भी बड़ी वजह
- बालिकाओं को खेल के लिए अभिभावक भेजने के लिए जल्दी से तैयार नहीं होते। टीम प्रभारी के रूप में महिला शिक्षक भेजने की बाध्यता होती है। इस कारण भी कई बार विद्यालय प्रबंधन टीम भेजने का झंझट मोल नहीं लेता।
- स्कूलों में बालिकाओं के लिए पृथक खेल मैदान नहीं हैं। विद्यालयों की जमीन कृषि कार्यों के लिए ठेके पर दे दी जाती है।
- जिला एवं ब्लाक स्तरीय की प्रतियोगिताएं दूरस्थ एवं अंदरूनी गांवों में रख दी जाती है। वहां पहुंचने, ठहरने आदि की माकूल व्यवस्था नहीं हो पाती।
इसलिए कम उपस्थिति
इस बार प्रतियोगिताओं के आयोजन का कार्यक्रम अचानक आया। इससे तैयारी का समय नहीं मिल सका। प्रतियोगिताओं के आयोजन स्थल भी कई बार बदले। कोरोना के चलते विद्यालय आदि बंद रहना भी बड़ा कारण माना जा सकता है। इन सबके चलते खेलों में खिलाडिय़ों की हाजिरी कम रही। - मस्तान सिंह, खेल प्रशिक्षक।



source https://www.patrika.com/hanumangarh-news/lack-of-players-in-sports-in-hanumangarh-7142964/

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