पहले एफआर, परिवादी ने खोजा वाहन तो पुलिस की भविष्यवाणी, 'मुल्जिम मिलने की भविष्य में नहीं संभावना'
पहले एफआर, परिवादी ने खोजा वाहन तो पुलिस की भविष्यवाणी, 'मुल्जिम मिलने की भविष्य में नहीं संभावना'
- सड़क हादसे के मामले में घटनास्थल से नम्बर प्लेट मिलने के बावजूद नहीं लगा वाहन एवं मालिक का पता
- परिवादी की सूचना के बाद पुलिस ने पुलिस चौकी के सामने 'लावारिस अवस्था मेंÓ किया वाहन जब्त
अदरीस खान @ हनुमानगढ़. सड़क हादसे में बाइक सवार की मौत प्रकरण में नम्बर प्लेट मिलने के बावजूद पुलिस वाहन और उसके मालिक को नहीं ढूंढ़ सकी। कोर्ट के आदेश पर पुन: जांच के दौरान परिवादी की तलाश के आधार पर पुलिस ने लावारिस अवस्था में वाहन जब्त किया। मगर मालिक को नहीं खोज पाई। खास बात यह कि मामले की पुन: जांच के बाद रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर पुलिस ने भविष्यवाणी भी कर दी कि नजदीक भविष्य में वाहन मालिक के मिलने की कोई संभावना भी नहीं है। खास बात यह कि पुलिस ने अंतिम पंजीकृत मालिक को तो ढूंढ़ लिया। मगर वाहन चालक कौन था, जिसने आगे खरीदा वह कौन था, इसका पता अब तक नहीं चल सका है।
सात साल से अधिक पुराने सड़क हादसे के मामले में पुलिस ने यह भविष्यवाणी की है। प्रकरण के अनुसार 20 जनवरी 2013 को टाउन में राधास्वामी डेरे के पास रावतसर रोड पर बाइक सवार को स्कॉर्पियो पीबी 02 एई 1515 ने टक्कर मार दी। हादसे के बाद चालक वाहन सहित भाग गया। मगर उसकी नम्बर प्लेट टूटकर वहीं गिर गई। बाइक चालक सहायक कृषि अधिकारी गणेशदत्त की मौत हो गई। इस संबंध में टाउन थाने में अज्ञात वाहन चालक पर मामला दर्ज कराया गया। पुलिस ने घटनास्थल से नम्बर प्लेट भी जब्त कर ली। मगर वाहन एवं उसके मालिक को नहीं खोज सकी।
खरीदने वाला फर्जी
प्रकरण की जांच कर पुलिस ने एफआर कोर्ट में पेश की। इसमें बताया कि रजिस्टे्रशन सर्टिफिकेट के अनुसार वाहन मालिक सुरेन्द्र सिंह गांव बाहरू, अमृतसर है। वह 2005 में ही लंदन चला गया। उसके पिता गुरबचन सिंह ने सेल्स लेटर दिया। इसमें वाहन खरीदने वाले का नाम कुलदीप सिंह पुत्र बक्सीस सिंह निवासी मकान संख्या 256, फेज संख्या सात जिला मोहाली बताया। मगर तय पते पर इस नाम का कोई व्यक्ति नहीं मिला। पता गलत दर्शाना पाया गया। तलाश के बावजूद वाहन और उसके मालिक का पता नहीं चला। रोचक यह कि सुरेन्द्र के पुत्र विरेन्द्र सिंह ने कोर्ट में मूल पंजीकरण सर्टिफिकेट भी पेश किया, वर्ष 2018 में। जबकि कई साल पहले ही वाहन का वे बेचान बता रहे थे।
एसपी को बताया कहां है वाहन
पुलिस ने एफआर अदम पता मुल्जिम में कोर्ट में पेश की। मगर कोर्ट ने एफआर नामंजूर कर पुन: अनुसंधान का आदेश दिया। इस बीच परिवादी पक्ष ने अपने स्तर पर पड़ताल कर दुर्घटना को अंजाम देने वाले वाहन का पता लगा लिया। मृतक की पत्नी मधु शर्मा ने एसपी हनुमानगढ़ को आठ अक्टूबर 2015 को पत्र भेजकर बताया कि वाहन पीबी 02 एई 1515 पुलिस चौकी सर्किट हाउस, थाना सिविल लाइन, अमृतसर में खड़ा है। संबंधित एएसआई के नम्बर भी प्रार्थना पत्र में लिखकर दिए गए।
भेजी शिकायत तो जब्त
परिवादी पक्ष ने मामले की जांच में पुलिस पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए एक्सेस टू सिस्टम संस्था के जरिए गृह मंत्री, राजस्थान एवं पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजे। इसके बाद पुलिस ने मामले के दोबारा अनुसंधान के दौरान अमृतसर में सर्किट हाउस परिसर में पुलिस चौकी के सामने लावारिस हालत में वाहन को जब्त किया। मगर आरोपी का पता नहीं चल सका। ऐसे में पुलिस ने कोर्ट में जांच रिपोर्ट पेश की। इसमें लिखा कि खोज करने पर भी आरोपी नहीं मिला और नजदीक भविष्य में भी उसके मिलने की कोई संभावना नहीं है।
ऐसा नहीं देखा कभी
अधिवक्ता शंकर सोनी ने बताया कि यह ऐसा दुलर्भ प्रकरण है जिसमें पुलिस ने अंतिम पंजीकृत वाहन मालिक को तो ढूंढ़ लिया। मगर वाहन चालक का पता नहीं लगा सकी है। ऐसा कभी नहीं देखा गया। इस प्रकरण में न्यायालय 39 लाख 87 हजार 8 रुपए का अवार्ड भी पारित कर चुका है। इस पर 19 जून 2015 से वसूली तक नौ प्रतिशत ब्याज दर का भुगतान भी करने का आदेश है। मगर अब तक वसूली नहीं हो सकी है।
source https://www.patrika.com/hanumangarh-news/first-fr-complainant-discovers-vehicle-police-predicts-no-chance-o-6759010/
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