हनुमानगढ़: केंद्र सरकार के अध्यादेशों का विरोध, बंद रही जिले की मंडियां


-प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन
हनुमानगढ़. हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से लाए गए कृषि संबंधी अध्यादेशों का विरोध शुरू हो गया है। व्यापारी व किसान वर्ग लगातार इसके विरोध में अपनी आवाज को मुखर कर रहा है। इसी क्रम में केंद्र सरकार की ओर से कृषि जिंस बिक्री, स्टॉक सीमा व भंडारण को लेकर जारी तीन अध्यादेश के विरोध में राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर शुक्रवार को जिले की अनाज मंडियां एक दिन के लिए बंद रही। व्यापारियों ने अपना व्यापार पूर्णतया बंद रखकर तथा प्रदर्शन कर इन अध्यादेशों का विरोध किया।
इसके बाद इन अध्यादेशों में संशोधन करने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे गए। जिला मुख्यालय पर जंक्शन की अनाज मंडी में व्यापारियों ने व्यापार संघ, व्यापार मंडल व फूडग्रेन व्यापार मंडल के बैनर तले विरोध-प्रदर्शन किया। इस मौके पर व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि कृषि जिंस बिक्री, स्टॉक सीमा व भंडारण को लेकर जारी तीन अध्यादेश से किसान, कच्चे आढ़तिया, तोला, हमाल व पल्लेदार पर विपरित प्रभाव पड़ेगा। किसान की कृषि जिंस गांवों में सीधे विक्रय होगी। इसके कारण किसान को कम भाव मिलेगा। भुगतान को लेकर झगड़ा, मतभेद बढ़ेंगे। किसान को समय पर भुगतान नहीं हो पाएगा। एपीएमसी एक्ट को मंडी से बाहर खत्म कर दिया गया है। ऐसे में व्यापारियों की मांग है कि कृषि उपज मंडी समिति में भी शुल्क खत्म किया जाए ताकि जो किसान मंडी में कृषि जिंस बेचना चाहता है उसको नुकसान नहीं हो। उन्होंने कहा कि स्टॉक सीमा खत्म करने के कारण कालाबाजारी बढ़ेगी। बड़ी कम्पनियों के इस क्षेत्र में प्रवेश से एकाधिकार बढ़ेगा। इनकी ओर से सारा स्टॉक अपने पास कर बाजार में कृत्रिम कमी दिखाई जाएगी। इसके कारण भाव ऊंचे होने से महंगाई बढ़ेगी व किसान का शोषण बढ़ेगा। एक राज्य से दूसरे राज्य में कृषि जिंस पर केरिंग चार्ज बहुत अधिक होंगे। एक से दूसरे राज्य में माल बेचना संभव नहीं रहेगा।

हो जाएंगे बेरोजगार
मंडी व्यापारियों ने बताया कि कच्चा आढ़तिया, धानका, तोला व लम्बरदार बेरोजगार हो जाएंगे। कृषि उपज मंडी के बड़े-बड़े शैड व पक्के पिड़ आदि बेकार हो जाएंगे। धानमंडी जो अब आबाद है वह खत्म हो जाएगी। बहुत से लोगों के सामने रोजी-रोटी की समस्या पैदा हो जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी किसान की मूलभूत आवश्यकताएं खाद, बीज, डीजल आदि का प्रबंध कच्चा आढ़तिया के माध्यम से होता है लेकिन अध्यादेश लागू होने के बाद इनका आपसी सम्पर्क टूट जाएगा। किसान को समय पर बीज, खाद, डीजल नहीं मिला तो समय पर बिजाई होना संभव नहीं होगा। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि इन अध्यादेशों की आड़ में सरकार एमएसपी खत्म करना चाहती है। यदि ऐसा हो गया तो किसान बर्बाद हो जाएगा जो पहले से ही नुकसान में चल रहा है। और नुकसान उठाने पर किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो जाएगा। पदाधिकारियों ने कहा कि इन तीनों अध्यादेशों के लागू होने से पैदा होने वाले हालातों को लेकर राजस्थान ही नहीं पंजाब व हरियाणा के व्यापारियों ने मिलकर एकदिन की हड़ताल रखी है।

मांगों से करवाया अवगत
मंडी में विरोध-प्रदर्शन के बाद व्यापारियों ने कलक्ट्रेट पहुंच कलक्टर जाकिर हुसैन को प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें बताया है कि किसान की कृषि जिंस एमएसपी से कम नहीं बिके, कृषि उपज मंडी शुल्क को पूर्णतया समाप्त किया जाए, अनाज मंडी आबाद रहे इसके लिए अध्यादेशों में आवश्यक संशोधन किए जाएं। यदि इन अध्यादेशों में संशोधन नहीं किया गया या इन्हें वापस नहीं लिया गया तो व्यापारी आगामी दिनों में सड़क पर उतरकर लड़ाई लडऩे को मजबूर होंगे। इस मौके पर व्यापार संघ अध्यक्ष पदम जैन, व्यापार मंडल अध्यक्ष प्यारेलाल बंसल, फूडग्रेन व्यापार मंडल अध्यक्ष महावीर सहारण, खाद्य व्यापार संघ अध्यक्ष अमर सिंगला, अमृतलाल गुप्ता, केवल बलाडिय़ा, कृष्णलाल गर्ग, सुखदेव गोदारा, पवन पूनियां, पंकज गुप्ता, सुधीर चौधरी सहित कई व्यापारी मौजूद थे। वहीं हड़ताल के बारे में मंडी समिति हनुमानगढ़ के सचिव सीएल वर्मा ने बताया कि अभी ऑफ सीजन है। इसलिए मंडी में कारोबार पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।



source https://www.patrika.com/hanumangarh-news/hanumangarh-opposition-to-central-government-ordinances-district-man-6352847/

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